तेरा बुहा नही छड़ना

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा खेतरपाल जंडा देया राजेया.

तेरा बुहा नही छड़ना,

तेरे सेवका ने फेंसला मुका लिया,

तेरा बुहा नही छड़ना,

तेरे दर दी बन गी नोकर,

रख ले भावे मार दे ठोकर,

मेनू जग दियां ठोकरा सता लिया,

तेरा बुहा नही छड़ना,

तेरे हथ विच मेरियां डोरा,

तू मिल जावे किवे तोडा,

तेरे नाम वाला चोला गल पा लिया,

तेरा बुहा नही छड़ना,

हर कोई करदा मेरी मेरी,

मैं ते जोगन बन गई तेरी,

तेरे झन्डा उते आके डेरा ला लिया,

तेरा बुहा नही छड़ना,

चढ़ गई तेरी नाम खुमारी,

सजदे करदी दुनिया सारी,

तेरे दर मैंने सिर नु झुका लिया,

तेरा बुहा नही छड़ना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।