चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

सौरभ मधुकर
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

दादी की जी म्हारी मइया की...

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

जोग लिखी झुंझनू से भक्तो

माँ को आशीष बचियो रे

याद सतावे म्हारे टाबर की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

कुशल मंगल मै हूँ झुंझनू में

थारो हाल बता द्यो जी

बेधड़ के बोल्यो बात्यां थारे मन की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

कितना ही दिन बीत्यां रे लाला

मिलबा ने मन तरसै रे

घड़ी रे घड़ी म्हाने आवे हिचकी

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

भूल से गर तू भूल भी जावै

पण म्हे थाने ना भूलूँ

राखूं खबर तेरी पल पल की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

चिट्ठी आई रे झुंझनू से म्हारी दादी की

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

दादी की जी म्हारी मइया की...

चिट्ठी आई रे...चिट्ठी आई रे...

संपर्क - 09831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।