रब दी कचेरी विच लेखे जदो होन गे

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

रब दी कचेरी विच लेखे जदो होन गे

कई ऊथे हसण ते कई ऊथे रोण गे

करके गुनाह बेडी बदिया वी भर लई

अमला दी पोथी खाली पाप नाल कर ली

हन्जुआ दे नाल बैठे कालक नु धोण गे

रब.......

डंगरा दे वांग जेह्डे सो गये ते खा गये

नफा लेण आये हथो मूल वी गवा गये

केड़ा मुह लेके अगे रब दे खलोण गे

रब.......

भला मांग हर दिन रब कोलो सब्दा

दुख देके दुज्या नु सुख नहियो लब्दा

मिलन्गे कड़े जेह्डे किकरा नु होण गे

रब........

धन ने ओ जीव जिनहा सतगुरु तारया

जप के ओ नाम जिनहा जनम सुधारया

उसदी ता मौत वेले सतगुरु होण गे

रब.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।