जीमो नन्दलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रुखो सुखो भावै नहीं भावै थाने माल

प्रेम सै जिमाऊँ थाने,आओ नन्दलाल

आओ नन्दलाल म्हारा मदन गोपाल

प्रेम सै जिमाऊँ थाने,आओ नन्दलाल..

आदत थाने पड़ी खोड्ली, गटका थाने आवै....

घर को थाने कदे न भायो,पर घर जाकर खावै

पर म्हार घरां क्यूँ नहीं आया,बोलो जी गोपाल

प्रेम सै जिमाऊँ थाने,आओ नन्दलाल!!१!!

घट-घट की थे जाणो बाबा,जाणो म्हारा हाल....

थारे पाण म्हारी गाडी चालै, खावां रोटी दाल....

जो म्हें जीमा थाने जीमावां,पहली थारी मनुवार

प्रेम सै जिमाऊँ थाने,आओ नन्दलाल!!२!!

शबरी क घर जुठो खाया,खाया बिदुर को साग

सुदामा का तंदुल भाया, म्हासुं के बैराग

करमा सो खीचड़ खुवावां, घी चुटियो दाल

प्रेम सै जिमाऊँ थाने, आओ नन्दलाल..!!३!!

प्रेम को भूखो श्याम कन्हियो,प्रेम झठे यो जावै

'टीकम' इ स हेत लगाल्यो, बिना बुलाया आवै

प्रेम भाव स म्हे भी ल्याया,आरोगो दयाल.....

प्रेम सै जिमाऊँ थाने,आओ नन्दलाल..!!४!!

भजन के भाव:श्री महाबीर सराफ ;टीकम'

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।