चिट्टा फुल गुलाबे दा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चिट्टा फुल गुलाबे दा

फुल्ला तैनू साम्भ के रखा

मेरी मैया जी दे बागे दा

कोठे उत्ते सुखावा छलिया

रूत नवरात्रेया दी यात्रा दवारे चलिया

चिट्टा......

खटैया पुट्टा लगावा मिठिया

मैया दर चलो भग्तो सानु मैया जी ने पाईया चिठिया

चिट्टा.......

लाल चुनी नु लगावा गोटा

मैया जी दे दर भग्तो कोई बडा ना कोई छोटा

चिट्टा.......

ओ फुल्ला की क्यारी है

देखो निकी सोहनी लग्दी मैया शेरावाली है

चिट्टा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।