जाने क्यों लोग लगाते है

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॥ पावन पाठ ॥

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा,

एह मीठी बोली वालो के मन छल का डेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

अपने मतलब के वासते सब प्यार दिखाते,

और वक़्त पड़े पर रंग बदल ते नजर आते,

रहे सुख में सारे साथ दुःख में मुह को फेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

हम साथ सदा है तेरे ये कहते नही थक ते.

कोई मुश्किल आज आये तो दूर खड़े है तकते,

जिनका लगता था रोज ही मेरे घर का फेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

जैसे खुद है हम वैसा ही दूजो को जाना,

जिसको अपना समजा वही निकला बेगाना,

है स्वार्थ का ही फेला जग में घोर अँधेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

जो कहते थे दिल जान से हम तुझपे है वारि,

उन पर दिल से विस्वाश गया मति गई मारी,

जिसको समजा सचा साथी निकला वो लुटेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

कुछ लोगो का पैसा खुदा पैसे की यारी,

लेते है साईं का नाम छुपी मन में मकारी,

करते है दिखावा साईं से सब कहते है तेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

करते है नाटक मन में श्रधा भाव नही है,

सच पूछो तो श्री चरणों में विश्वाश नही है,

लेते है आड़ साईं की लालच है बथेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

विश्वाश का खुनी बना है ये रणजीत ज़माना,

अपने बेगानो में सुभाश नही फर्क है जाना,

कब होगा भरोसे का जाने इस जग में सवेरा,

जाने क्यों लोग लगाते है चेहरे पर चेहरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।