न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ

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॥ पावन पाठ ॥

न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ,

पता साई दा तू साई जी दे प्यारेया तो पूछ,

जेहड़े तन मन तो साई जी दे प्यारे हो गये,

ओहना पल पल रब दे नजारे हो गये,

ओह ते दीं नाले दुनिया तो न्यारे हो गये,

बिना किते ओहना दे काज सारे हो गये,

ना हवावा कोलो पूछ न नजारिया तो पूछ,

पता साई दा तू साई जी दे प्यारेया तो पूछ,

न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ,

प्रीत साई जी दे चरना च जोड़ के ते वेख,

मोह माया दिया वेहड़ियाँ न तोड़ के ते देख,

रोग मुख जान गे दुःख झुक जानगे,

राह ज़िंदगी दी साई वाल मोड़ के ता देख,

तकदीरा तो न पूछ न सहारिया तो पूछ,

पता साई दा तू साई जी दे प्यारेया तो पूछ,

न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ,

साई दर्शन दा दीवाना ते निहाल हो गया,

साई नाम धन पा के खुशाल हो गया,

साई मस्ती दा मस्तना मालो माल हो गया,

दुनिया केहन्दी वेखो साई दा कमाल हो गया,

राहगीरा तो न पूछ ना बंजारिया तो न पूछ ,

पता साई दा तू साई जी दे प्यारेया तो पूछ,

न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ,

जह्नु चढ़ गई चढ़ गई साई नाम दी खुमारी,

ओह ता साई शदए जींद साई उते वारि,

साई रेहमत ते समंदर भर दे निर्मल जल दी गागर,

साई इक पल विच ओह्दी बिगड़ी सवारी,

न समंदर तो पूछ न किनारियाँ तो पूछ,

पता साई दा तू साई जी दे प्यारेया तो पूछ,

न तू चाँद कोलो पूछ न सीतारेया को पूछ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।