रंग बरसे दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग बरसे दरबार रोनका लगियां ने,

तेरी हो रही जय जय कार रोनका लगियां ने,

रोनका लगियां ने रोनका लगियां ने

तेरे दर दे वेख नजारे होये सब दीवाने माँ,

छोटे वडे विच फर्क न कोई सब नु एक ही जाने माँ,

इथे मिलदा प्यार सब नु रोनका लगियां ने,

तेरी हो रही जय जय कार रोनका लगियां ने,

कोई मंगदा धन ते दोलत कोई मंगदा लाल नि माँ,

सब दी झोली भर जन्दी तेरी रहमत दा कमाल नि माँ,

तेरे खुले ने भण्डार रोनका लगियां ने,

तेरी हो रही जय जय कार रोनका लगियां ने,

नच्दे गाउंदे भगत प्यारे ढोली ढोल ब्जाउन्दा है,

संगम दे नाल मिल के लक्की तेरिया भेटा गाउंदा है,

आज हो गया सब नु दीदार रोनका लगियां ने,

तेरी हो रही जय जय कार रोनका लगियां ने,

गायक लककी शेखावत 9463501003

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।