घर भी नरक जेया लगदा

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॥ पावन पाठ ॥

धिया माँ पेया दा मान जाने सारा ही जहां,

पर मारण लगेया धी नु दिल चो सी न हॉवे,

ओ घर भी नरक जेया लगदा जिथे धी न हॉवे,

धियाँ जम दियां हों पराईया एहना दे दूर बसेरे,

एह जग दा दस्तूर एह वस तेरे न मेरे,

इंज धियाँ कोलो बिन माँ प्यारे जी ना हॉवे ,

ओ घर भी नरक जेया लगदा जिथे धी न हॉवे,

धी बाबुल दे घर रेह्न्दी ओहदा मान रखी,

पड़ लिख के कुझ बन जावा एह अरमान रखदी,

पर धियाँ कोलो दुःख प्याला पी ना हॉवे,

घर भी नरक जेया लगदा जिथे धी न हॉवे,

ओह वीर दी सुख मंगदी माँ कोलो सदके जावे,

सब नु अपना समजे बेगानी आप कहावे,

फिर भी धियाँ तो माँ पेया दा दुःख पी न हॉवे,

घर भी नरक जेया लगदा जिथे धी न हॉवे,

गायक लक्की शेखावत 9463501003

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।