हंजू बन धुल्दा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हंजू बन धुल्दा है अखा चो प्यार दातिये तेरा,

तू बह गई विच पहाड़ा दे माँ,

खयाल ना आया मेरा,

हंजू बन धुल्दा है अखा चो प्यार दातिये तेरा,

होया फिरा बिखारी माँ मेनू लोकी ने कमला कहंदे,

खुश नसीबा वाले माये जो दर ते तेरे रहंदे,

तेरे दर मैं आ नही सकदा दुखा पाया घेरा,

हंजू बन धुल्दा है अखा चो प्यार दातिये तेरा,

भगत तेरियां भगता गाउंदे रल मिल ख़ुशी मनौन्दे,

आजा माये शेरावालिये दर्शन करना चाहुंदे,

अखिया माये तरस गईयाँ ने दर्श कर्ण नु तेरा,

हंजू बन धुल्दा है अखा चो प्यार दातिये तेरा,

सनी खैरा मंगदा माये खैर झोली विच पा दे,

किनी देर दे सुते माये आके भाग जगा दे,

तू ही दस दे माये मेरिये तेरे बिन कौन मेरा,

हंजू बन धुल्दा है अखा चो प्यार दातिये तेरा,

गायक लककी शेखावत 9463501003

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।