लगे लंगर प्यारे मेरी मियाँ दे द्वारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लगे लंगर प्यारे मेरी मियाँ दे द्वारे,

आओ रज रज खा लिये,

माँ शेरावाली नु नच के मना लाई ये,

कई ख्वावन टिकी डोसा कई खवावन भल्ले,

माँ मेरी ता चिठियाँ लिख लिख आप सुनेहे घले,

किते घड़ियाँ ते ढोल बड़ा सुंदर माहोल,

आओ रज रज खा लिये,

माँ शेरावाली नु नच के मना लाई ये,

कई ख्वावन छोले पूरी कई ख्वावन हलवा,

आजो भगतो माँ दर चलिये जे माँ दा वेखना जलवा,

किते मिल्न पकोड़े जांदे ने भगत ने दोड़े,

आओ रज रज खा लिये,

माँ शेरावाली नु नच के मना लाई ये,

कई पेयावन शेक प्याले,

कई पेयावन जीरा,

मावा मंगन पूत मियाँ तो भेना मंगन वीरा,

किते रबड़ी ते लछे माँ दे भगत ने सचे,

आओ रल मिल खा लिये,

माँ शेरावाली नु नच के मना लाई ये,

जिथे मिलेगा अम्ब संदुरी,

किते मेले गा केला,

धरमिंदर नाल माँ दर चलिये,

लगेया माँ दा मेला,

गौंडा लक्की गुण गान माँ दी महिमा महान,

रज दर्शन पा लिये,

माँ शेरावाली नु नच के मना लाई ये,

गायक लककी शेखावत 9463501003

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।