दोष मेरे तु माफ करदे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दोष मेरे तु माफ करदे , हाथ अर्जा गुजारा माँ,

मोड़ दे मेरे खुशीया खेड़े , मोडदे मौज बहारा माँ,

भाग मेरे विच डेरा पक्का , पतझड ने माँ लाया ए ,

गिना तरीका रोज़ उड़ीका , सावन मुड न आया ए ,

बेल मेरी तु फेर वधादे , लादे फूल दुबारा माँ ,

नैना दे विच हंजू माऐ , बुल्लां ते मुस्कान नहीं,

हास्से मेरे लै जो उडीआ , रूकदां क्यू तुफान नहीं ,

रौनक न कोई दिसदी मैनूं , सुनां है जग सारा माँ,

खावां विच न सोची जेहडी , किवे सुनामी आ गई ए,

कुछ नई छडीया कुज नई बचेया , सारा कुज मुकां गई ए ,

अन्दर तक मैनू तोड़ गई ए , पा गई बड़ा खिलारा माँ ,

अर्जा गर्जा टूटे सुपने , बचिआं खुचीआं आसां ने ,

सागर वरगे कुज अपने , जो दिंदे बड़ा दिलासा ने ,

आस मैं रखी तेरे उते , सुन लै अज पुकारा माँ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।