हृदयी रहा रे दयाघना

सुरेश वाडकर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हृदयी रहा रे दयाघना

मन:शांती दे मन मोहना

चरणी तुझ्या ही प्रार्थना ||

तू जाणसी, कि अजाण मी ,

जगतो परी निष्प्राण मी

प्राणेश्वरा, करुणाकरा ,

संजीवनी दे जीवना ||

हृदयी रहा रे दयाघना ...

लय ताल स्वर झंकार तू,

श्वासातला ओमकार तू

वर पामरा दे श्रीधरा,

अखंडित राहो स्वराधाना ||

हृदयी रहा रे दयाघना ...

गीत : अरुण सराफ

संगीत : अरुण सराफ

गायक : सुरेश वाडकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।