सानूं तेरी आदत पै गई ऐ

अशोक शर्मा "दास"
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा विछौड़ा झळल्या न जावे,

बिन मिल्या सानूं चैन न आवे,

होर न बाकी दिल विच्च कोई, हसरत रह गई ऐ,

तेरे दर्श दी माँयें, सानूं आदत पै गई ऐ,

माँयें नी सानूं आदत पै गई ऐ, सानूं तेरी आदत पै गई ऐ,

तेरी ममता दी छाँवें माँ, जो सुख मिलदा ऐ,

लाड लडावें जद तूं, दिल ड़ा गुलशन खिलदा ऐ,

साडे पल्ले बस एहो इक्क, दौलत रह गई ऐ,

तेरे दर्श दी माँयें.......

सूना सूना लगदा ऐ माँ, बिन तेरे वेहड़ा,

तैनूं वेख के खिल जांदा ऐ, बच्चेयाँ दा चेहरा,

तेरे कर के साडे सिर तों, चिंता लैह गई ऐ,

तेरे दर्श दीं माँयें.........

बिन तेरे इक्क पल वी माँयें, जी नहीं पावांगे,

जहर जुदाई वाला हरगिज, पी नहीं पावांगे,

"दास" रहे चरणां विच्च, एहो चाहत रह गई ऐ,

तेरे दर्श दी माँयें.........

स्वर : पुनीत खुराना

रचना : अशोक शर्मा "दास"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।