जोगी तेरे दर आके

पारंपरिक
माँ गंगा भजन बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

हो जोगियां,हो जोगियां,

जोगी तेरे दर आके अरजा गुजार दा,

नौकर बना ले जोगी मैनु दरबार दा,

ठोकर न मार जोगी दर उते आया नु,

होर न सतावी जोगी जग दे सताया नु,

मन दा प्यासा जोगी सदा तेरे यार दा,

नौकर बना ले जोगी मैनु दरबार दा,

कर के दीदार तेरा दुःख टूट जांदे ने,

चरण गंगा च नहाके रोग मूक जांदे ने,

नाम तेरा जोगी डुभे वेहडया नु तार दा,

नौकर बना ले जोगी मैनु दरबार दा,

दुख दे मारिया नु इंज नहीं सताई दा,

भगता निमानिया नु गल नाल लाइ दा,

तेरा एह बिशोडा जोगी दिल न सहार दा,

नौकर बना ले जोगी मैनु दरबार दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।