साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे

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॥ पावन पाठ ॥

साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे,

वो ही तो है जिसने सब की सब गुथियाँ सुलझाई रे,

साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे,

कहा कहा सुख ढूंढा तुमने किस किस घूम चुके हो,

जब से इस संगत में आये बेफिकरी में झूम चुके हो,

अब तो थाम लो ये दरवाजा बहुत ठोकरे खाई रे,

साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे,

किसकी है गमखारी दुनिया इसने किसका साथ दिया है,

जब साई को याद करोगे साई ने अपना हाथ दिया है,

साई तो है इक अटल हकीकत दुनिया इक परछाई रे,

साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे,

अंधियारे मिट ते जाते है रोशनी हर सु फेलरही है,

हर जीवन के हर सपने में साई खुशबू फैल रही है,

समज भी लो ये महकती कलियाँ किस गुलशन से आई रे,

साई से मांगो साई रे साई से मांगो साई रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।