ओ म्हारा गजानंद सरकार पधारो कीर्तन के माहीं

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज: थारी नगरी में सांवरिया….)

ओ म्हारा गजानंद सरकार पधारो कीर्तन के माहीं

कीर्तन के माहीं पधारो कीर्तन के माहीं

प्रथम न्योतो म्हे भिजवायो ,

बिन थारे म्हारो जी भरमायो ,

क्या में अटक्या समझ ना पायो ,

रंग बरसाओ थे ही देवा , बिच सभा माहीं

आवण की थे करल्यो त्यारी ,

मूसे की कर के असवारी ,

लीला आज दिखाद्यो थारी ,

कीर्तन की सब हुई तैयारी , ले लो थे राहीं

देवी देव सब राह निहारे ,

शिव शंकर के लाल दुलारे ,

पार्वती के आँख के तारे ,

कृपा की बरसात करो थे , देर करो नाहीं

देखो देव दया बरसावै ,

कीर्तन माहीं रंग जमावै ,

देवी देवता सब हरषावै ,

'देवकीनंदन' शरण आपकी , चरणां के माहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।