मां बंगलामुखी के धाम में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अजब निराली शक्ति है मां ; मां बगलामुखी के नाम में,

इच्छापूर्ण हो जाए ; मां बंगलामुखी के धाम,

जो चाहो वह मिल जाए ; मां कभी ना देर लगाए,

जो भी आऐ द्वार मईया के ; सब की आस पूजाए,

हर पल आप सहाई होती ; भक्तों के शुभ काम मै,

गुरुवार को मईया के ; दरबार पर मिले लगते हैं,

शंखनाद घड़ियाल नगाड़े ; मां के दर पर बजते हैं,

झूम रहे हैं भक्त मंदिर में ; रात और दिन सुबह शाम में,

बनखंडी पर्वत से चलकर ; आई आध भवानी ,

बंगलामुखी धाम में बैठी ; जगजननी महारानी ,

दुष्टों का नाश है करती ; उनके बुरे परिणाम में ,

पीले वस्त्र पहन पुजारी ; मां का ध्यान लगाते हैं ,

योगीराज सत्यनाथ जी ; हवन यज्ञ करवाते हैं ,

पीले वस्त्र है शोभा देते ; मां की सुंदर शाम में ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।