हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ

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॥ पावन पाठ ॥

हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ,

इक वारि दर्श दिखाओ जी अपने चरनी लाओ जी गुण गावा दिन रात,

हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ,

मोर दी करके आओ सवारी संगत बैठी उडीके सारी,

करो रेहमत दी बरसात,

हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ,

तू है सारे जग दा वाली दर तो न कोई जावे खाली,

देवो खुशियां भरी सौगात,

हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ,

विक्की बैठा मल के द्वारा जोगी मैनु देयो सहारा,

देयो नाम जपं दी दात,

हे मेरे जोगी नाथ हे मेरे जोगी नाथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।