मेले दियां खुशियां मना लो भगतो नच नच के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सारे दुःख मिटा लो बाबा जी नु दस दस के,

मेले दियां खुशियां मना लो भगतो नच नच के

चेत महीने जोगी दर मेला लगेया,

हर पसे रोनका पंडाल सोहना सजेया,

रज रज दर्शन पा लो गुफा च बैठे योगी वस् के,

मेले दियां खुशियां मना लो भगतो नच नच के

बाबा तिरलोक सिंह हर साल आउंदे ने,

हर साल मेले उते संगत ले आउंदे ने,

सुखपाल सेवा मंदिर दी करदा वेखो किवे हस हस के,

मेले दियां खुशियां मना लो भगतो नच नच के

तोड़ दिया ताला नाले ताल नु मिला देयो,

विक्की गावे महिमा ओहदे नाल नल गा लवो ,

जोर नाल बजाओ जरा ताड़ियाँ हथा नु उते चक चक के,

मेले दियां खुशियां मना लो भगतो नच नच के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।