पल पल तेरे साथ मैं रहता हु

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॥ पावन पाठ ॥

पल पल तेरे साथ मैं रहता हु,

डरने की क्या बात मैं बैठा हु,

पल पल तेरे साथ मैं रहता हु,

तूफ़ान के आगे तेरा दिल गबराते है,

मैं साथ हु तेरे तू क्यों भूल जाता है,

जब आँख तेरी भर्ती दिल मेरा रोता है,

मेरे आंसू का कतरा तेरी आंख में होता है,

जब दुःख में हो बेटा तब बाप ही रोता है,

पल पल तेरे साथ मैं रहता हु,

संगर्ष है जीवन संघष किये जा तू,

सुख दुःख दो पहलु है मस्ती में जिए जा तू,

क्यों हारता है तू हालतो के आगे तेरा होंसला बन के जब मैं चलता आगे,

मैं भी नहीं हु सोता सारी रतिया तू जागे,

पल पल तेरे साथ मैं रहता हु,

ये दौर बीते गा नया दौर आएगा,

कांटो की राहो पे चला न जाएगा,

ये रात काटी तो दिन बी कट जाएगा,

विश्वाश रख मुझपे रस्ता मिल जाएगा,

जीवन की पहेली को तू खुद सुलझाएगा,

पल पल तेरे साथ मैं रहता हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।