बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु आज आकर भुलाना ये ठीक नहीं,

हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है प्रभु आज आँखे चुराना ये ठीक नहीं,

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु.......................

तू तो जाने के दास कमजोर है तेरा द्वारे खड़ा कर जोड़ है,

फिर भी तू करता क्यों न दया की नजर,

तेरे होते फिरू मारा मारा प्रभु देख इतना रुलाना तो ठीक नहीं,

हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है प्रभु आज आँखे चुराना ये ठीक नहीं,

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु.......................

तेरी लीला है क्या मेरा संवारा बैठा दर पे निहारे तेरा वनवारा,

ये बता तू कहा देखता है किधर,

दिल की मजबूरिया है बता न प्रभु रोज करना बहाना ये ठीक नहीं,

हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है प्रभु आज आँखे चुराना ये ठीक नहीं,

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु.......................

तेरे हाथो में जीवन की डोर है,

ध्यान तेरा क्यों नहीं मेरी और है,

हु परेशान मैं आजा तू एक बार,

दास की भी विनती न भुलाना प्रभु,

ये ज़माना हसाना तो ठीक नहीं,

हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है प्रभु आज आँखे चुराना ये ठीक नहीं,

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु.......................

है पता की तू आये मेरे सँवारे,

दीन दुखियो को है तेरी छाव रे,

है भरोसा तेरा साथ तेरा रहे,

अब तेरे बिन रहे देवीकी न प्रभु न लगाया गले से तो ठीक नहीं,

हु तेरा ही तो मैं तू मेरा है प्रभु आज आँखे चुराना ये ठीक नहीं,

बचपन से तुझे मैंने माना प्रभु.......................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।