रेहम कीजिये साई दया कीजिये

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॥ पावन पाठ ॥

रेहम कीजिये साई दया कीजिये,

हमे आफतो से बचा लीजिये,

रेहम कीजिये साई दया कीजिये,

साई को पुकारे तो हर ये ज़माना,

अदीनो का दीनो का तू है ठिकाना,

बिगड़ी हमारी भी बना दीजिये,

रेहम कीजिये साई दया कीजिये,

यही है तमना मिले ये सहारा चरण हो तुम्हारे और सिर हो हमारा,

मुकदर को ये हुकम सुना दीजिये,

रेहम कीजिये साई दया कीजिये,

हज़ारो तुम्हारे जग में पुजारी,

मगर सच्ची निश्ठा के तीनो मजारी,

हमे सच का दर्शन दिखा दिज्ये,

रेहम कीजिये साई दया कीजिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।