आज साई दे दरबार भंगड़ा पा मित्रा

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॥ पावन पाठ ॥

आज साई दे दरबार भंगड़ा पा मित्रा नच नच गा मित्रा,

कर साई दी जय कार के भंगड़ा पा मित्रा,

धरती नचे अम्बर नचे नचन चन सितारे,

दसो दिशावा झूम के नचन नचन सारे नजारे,

साई दे दरबार नच्दे मस्त कलंधर सारे,

मैं नचा तूसी नचो नचदा सारा संसार के भंगड़ा पा मित्रा,

आज साई दे दरबार भंगड़ा पा मित्रा नच नच गा मित्रा,

साई दे दरबार दा भगतो तक लो अज़ाब नजारा,

साई दे सोहने रूप ते वारि जावे अज जग सारा,

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई साई सब दा प्यारा,

साई सब ते लुटावे प्यार के भंगड़ा पा मित्रा,

आज साई दे दरबार भंगड़ा पा मित्रा नच नच गा मित्रा,

साई जी दे प्यारेया नु आज साई दें वधाई,

साई ने सब नु रेहमत बक्शी साई दी बद्याई,

साई जी दे दर ते वजदी हर दिल दी शहनाई,

साई लायै खुशियां हज़ार के भंगड़ा पा मित्रा,

आज साई दे दरबार भंगड़ा पा मित्रा नच नच गा मित्रा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।