अति कभी ना करना प्यारे इति तेरी हो जायेगी

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॥ पावन पाठ ॥

अति कभी ना करना प्यारे इति तेरी हो जायेगी,

बिन पंखो के पंक्षी जैसी गति तेरी हो जायेगी,

अति सूंदर थी सीता मइयां जिसके कारण हरण हुआ,

अति घमंडी था वो रावण जिसके कारण मरण हुआ,

अति सदा वर्जित है बंदे क्षति तेरी हो जायेगी,

बिन पंखो के पंक्षी जैसी गति तेरी हो जायेगी,

अति वचन बोले पांचाली महाभारत का युद हुआ,

अति दान दे कर के राजा बलि भी बंधन युक्त हुआ,

अति विशवाश कभी न करना मति तेरी फिर जायेगी,

बिन पंखो के पंक्षी जैसी गति तेरी हो जायेगी,

अति बलशाली सेना लेकर कौरव चखना चूर हुये,

अति लालच वस् जाने कितने सत कर्मो से दूर हुये,

अति के पीछे हरष न भागो अति अंत करवाएगी,

बिन पंखो के पंक्षी जैसी गति तेरी हो जायेगी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।