काली हो कलकत्ते वाली माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली हो कलकत्ते वाली माता,

तू कजो वसी है एहनी दूर मेरी माता,

होर ते भेना तेरिया नेड़े वसियां एहनी दूर मेरी माँ,

होर ता भेना तेरियां लाल चुनी ओढ़ दियां,

तू काजो ओढ़े काली चुनी मेरी माँ,

काली हो कलकत्ते वाली माता,

तू कजो वसी है एहनी दूर मेरी माता,

होर ता भेना तेरी लाल बिंदियां लांदियाँ.

तू काहतो लाया काला टिका मेरी माँ,

काली हो कलकत्ते वाली माता,

तू कजो वसी है एहनी दूर मेरी माता,

होर ता भेना तेरियां फुला दियां माला पाउंदियाँ,

तू कजो पाई मुंड माला मेरी माँ,

काली हो कलकत्ते वाली माता,

तू कजो वसी है एहनी दूर मेरी माता,

होर ता भेना तेरियां हलवा पूरी खांडियां,

तू काजो भरया खून कटोरा मेरी माँ,

काली हो कलकत्ते वाली माता,

तू कजो वसी है एहनी दूर मेरी माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।