जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना

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॥ पावन पाठ ॥

जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना गौआँ दा न पाली रखदी,

जे मैं जांदी हथ चिमटा जोगी दे सिगा बाना,मैं कोई ता निशानी रखदी,

जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना गौआँ दा न पाली रखदी,

बारा साल पहला जोगी पिंड़ साडे आया सी,

रत्नो सा सुता भाग जगाया सी,

असि मन लिया मीठा ओहदा बाना,मैं कोई ता निशानी रखदी,

जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना गौआँ दा न पाली रखदी,

रब दियां लिखियाँ नु कौन बाबा ढाल दा,

खेता विच दिखे जीवे जोगी गौआँ चारदा,

रोग लग गया मैनु ही पुराना,मैं कोई ता निशानी रखदी,

जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना गौआँ दा न पाली रखदी,

शाहतलियाँ वाला जोगी केहड़े वेले आउगा,

बिटटे सतविंदर दे भाग जगाओ गा,,

राज लिखे गाये दास निमाणा मैं कोई ता निशानी रखदी,

जे मैं जांदी जोगी ने छड़ जाना गौआँ दा न पाली रखदी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।