नच नच के हज़ारियाँ लाओ

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॥ पावन पाठ ॥

शाहतलाई विच बाबा जी दा डेरा,

सोने दी गुफा विच बैठा जोगी मेरा,

आज रज रज दर्शन पाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

नच नच के हज़ारियाँ लाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

बाबा जी दी शान सारे जग तो न्यारी है,

रज दा नी दिल वेख सूरत प्यारी है,

ऐवे हाथो न वेला एह लंगाओ भगतो

नच नच के हज़ारियाँ लाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

श्रदा दे नाल जिहने बाबा नु ध्या लिया,

कटे दुःख बाबा जी ने सुख ओहने पाक लिया,

मेरे जोगी नु दुखड़े सुनाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

नच नच के हज़ारियाँ लाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

दुरो दुरो संग दर बाबा जी दे आये ने,

रोट परशाद नाल झंडे भी ले आये ने,

जरा गज के जैकारे लाओ भगतो मेरे जोगी दे द्वारे,

नच नच के हज़ारियाँ लाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

दीपक ते वालीया भी हाज़री लगाउँदै ने,

नच नच बाबा जी दी महिमा नु गाउँदे ने,

दर आके ना एमए समजाओ भगतो मेरे जोगी दे द्वारे,

नच नच के हज़ारियाँ लाओ भगतो मेरे बाबा दे द्वारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।