साइयों नी मेरा साई

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॥ पावन पाठ ॥

साइयों नी मेरा साई मेरे भाग जगावण आया,

मेरा मुरशद मेरा साई मैनु आपने बनावन आया,

साइयों नी मेरा साई मेरे भाग जगावण आया,

साई दर ते अलख जगाई साई प्रेम की ज्योत जगाई,

साई आज मेरे घर आये साई ने प्रीत निभाई,

आज मुरशद मेरा साई मैनु अपना बनावन आया,

साइयों नी मेरा साई मेरे भाग जगावण आया,

साई चरना च ला ले यारी टूटे दुःख दर्द बिमारी,

तन मन साई ते वारि मैं छड़ी दुनिया सारी

मेरी बिगड़ी बनावन आया मेरे काज स्वारन आया,

साइयों नी मेरा साई मेरे भाग जगावण आया,

आज घर विच खुशिया आइया मैनु लोकि देन वदाईयाँ,

आओ नि साइयो सजके आज नचा गे रज रज के,

ढोली ढोल वजा आज नचना है आज नचना है,

नचा गे सारी रात मेरे साई आई है,

मेरे पैरा विच घुंगरू मैं नचा गई छम छम,

रेहमत बरसावन आया मेरे दुखड़े मिटावन आया,

साइयो नि मेरा साईं मेरे भाग जगावण आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।