ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां

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॥ पावन पाठ ॥

ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां,

सिर उते सज दियां सोह्नियाँ जतावा जी,

अख बंद कर मैं दीदार तेरा पावा जी,

गल सिंघी तेरा हाथ कोल चिमटा,

देख खिड़े रूह जोगियां,

ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां,

देख रूहानी चेहरा दिल नहियो रज दा,

मैं चरना च बेठ करा बार बार सजदा,

रूप चन नालो वध पेया चमके जीवे चिता रूह जोगियां,

ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां,

सिद्ध गाव नीले वाला मंदिर प्यारा जी,

जोगी नाम दियां जिथे लगियां बहारा जी,

आया चेत महिना तेरा सोहना बुलाला दर तू जोगियां,

ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां,

अपरियाँ वाला है मुरीद तेरे दर दा लिख के मनीश सिफता है करदा,

जस्सी नीले वाला भी हथ जोड़ दा पट्टी न साथो मुह जोगियां,

ना तक़ तक़ रजदा तनु दिल मेरा चन जेहा तू जोगियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।