अजे जितना दर्श तेरा होया

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॥ पावन पाठ ॥

अजे जितना दर्श तेरा होया दीदार तेरा होया तक़ तक़ नैन थक गये,

की हो गई साई मेतो भुलना दर दर पै गया मैनु रूलणा,

दया नहीं तेरे चरना नु छोया दीदार तेरा होया साई तक़ तक़ नैन थक गये,

अजे जितना दर्श तेरा होया दीदार तेरा होया तक़ तक़ नैन थक गये,

केहड़े फुला दी बाबा माला चढ़ावा तू ते आप है फुला ते बहारा,

मैं ता हंजूआ दा हार लें आया दीदार तेरा होया साई तक़ तक़ नैन थक गये,

अजे जितना दर्श तेरा होया दीदार तेरा होया तक़ तक़ नैन थक गये,

कर किरपा तेरा दर्शन पावा,

हीरा जनम अमर बनावा,

कानू दास कोलो मुख नु लकोया दीदार तेरा होया साई तक़ तक़ नैन थक गे,

अजे जितना दर्श तेरा होया दीदार तेरा होया तक़ तक़ नैन थक गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।