मुझे अपनी शरण में लेलो

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॥ पावन पाठ ॥

दुनिया ने ठुकराया मुझको साई तू है सहारा ,

मुझे अपनी शरण में लेलो,

नीम तले शिरडी में आकर तुम ने समाधि लगाई,

कड़वे नीम को मीठा करके साबित कर दी खुदाई,

श्रद्धा सबुरी केशव दो से मैंने अर्ज लगाई,

मुझे अपनी शरण में लेलो......

माया का लोभी था सिकंदर मौत से बच न पाया,

खाली हाथ गया दुनिया से क्या था जग में लाया,

मेरी भी नैयाँ पार लगा दे साई तू है किनारा,

मुझे अपनी शरण में लेलो,...........

कोई नहीं है दुःख में अपना तू है दुखी का सहारा,

हस के इतना कह दे बाबा साई तू है हमारा,

हमसर ने जब ध्यान लगाया साई तुझको पुकारा,

मुझे अपनी शरण में लेलो,...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।