जोगियां तेरिया कुंडला ते

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॥ पावन पाठ ॥

जोगियां तेरिया कुंडला ते सची जी सची मैं ता आशिक होई,

जिह्दन दियां लगियां ने सची जी सची मैं ना चज नाल सोई.

जोगियां तेरिया कुंडला ते.........

मैं जिथे भी तुर जावा मैं ओथे तेरे निशाने देखे,

चारो पासे तू ही तू के हर था पेंदे तेरे भुलेखे,

उतो उतो ना कहन्दी वे मैं धुर अन्दर तक तेरी होई,

जोगियां तेरिया कुंडला ते .......

तारा तारा के बाबा तेरे पैरा तो मैं सारी जिंदगी वारा,

तेरे विच कमंड तो तू मेनू इक दो घुट लवा दे,

या एदा कर बाबा तू मेनू भूका नाल पिला दे,

मैं आज ओ भी पीनी है जेह्डी तू नैना विच लकोई,

जोगियां तेरिया कुंडला ते.....

रावा रावा के जे मैं तेनु भुल जावा उसे वेले ही मर जावा,

तू जपदा शंकर नु मैं हर दम तेरा नाम द्यावा,

तेरे बिन गुजारा नही मैं ताहियो गुफा दे गेहडे लावा,

गोतम नु गल ला ले दोनों हाथ जोड़ करे अर्जोई,

जोगियां तेरिया कुंडला ते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।