ना जावी पाली

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॥ पावन पाठ ॥

ना जावी ना जावी पाली ' शाहतलाईया होना खाली,

तेरे बाजो तेरीया , गऊआं ने भी रोणा ए,

उड़ गई नींद मां रत्नो दी कदे न सोना ए ,

तेरीया विछोया दी , आग मैनू साडेगी ,

तू भी ज़रा सोच दिन , किवे मां गुजारे गी,

दिल मन्दा नई अज तु परैणा ए ,

तू तूर जाना मैनू मां कौन बोलेगा,

तेरे बाजो दस केहडा दुखडे फरोलेगा,

लालै ए गुस्सा जेहडा मेरे उते लाणा ए,

तेरे बाजो पाली मेरा दिल नईयो लगणा,

छम-छम नीर मेरी अखीयां चो वगणा,

राता कालीया ने आणके डरोणा ए ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।