कदे सुनिया नु दुखड़ा

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॥ पावन पाठ ॥

कदे एह दर भटका कदे ओह दर भटका,

योगी ला चरना दे नाल,

दुनिया नु दुखड़े मैं की सुनावा,

जी तू भी न सुने मेरे नाथ,

कदे सुनिया नु दुखड़ा मेरा एहना केहड़ा कम पे गया,

कदे पाया नहियो घर वाला फेरा एहना केहड़ा कम पे गया,

मैं ता सुनिया जोगी दिला दिया जान दा,

कदे सुनिया न दुखड़ा मेरा, एहना केहड़ा कम पे गया

मैं ता सुनिया जोगी वड़ा ललारी है,

गध रंगियां नहीं जूपता मेरा,

एहना केहड़ा कम पे गया

मैं ता सुनिया जोगी बड़ा हकीम है,

कदे किता न इजाज तुसी मेरा,

एहना केहड़ा कम पे गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।