विच्च पहाड़ां गुफा दे अन्दर मन्दिर एक निराला ए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

विच्च पहाड़ां गुफा दे अन्दर, मन्दिर एक निराला ए

बारो महीने खुलेया रेह्न्दा, ना बुहा ना ताला ए

जय माता दी केहन्दे केहन्दे चढ़दे लोग चढाईआं ने

इक पासे ने ऊँचे पर्वत दूजे पासे खाईयां ने

फिर वी जो दर्शन नु आउँदा, समझो किस्मत वाला ए

बारो महीने खुलेया रेह्न्दा...

औंदी जांदी संगता दा जित्थे रेला लगया रेह्न्दा ए

दिन होव या रात होव बस मेला सजिया रेह्न्दा ए

हर कोई लावे माँ दे जयकारे, की गोरा की काला ए

बारो महीने खुलेया रेह्न्दा...

निकीयां निकीयां कंजका दे विच्च माँ दा रूप नज़र आवे

पूजे कंजका पावे असीसा, उस्दा भाग सवार जावे

हुंदे दूर गमां दे हनेरे मिलदा सुख दा उजाला ए

बारो महीने खुलेया रेह्न्दा...

की की सिफत करां इस दर दी जित्थों सब कुछ मिलदा ए

वास है माँ दा जिसदी रजा बिन पत्ता वी न हिल्दा ए

दास एह ही मात वैष्णो एही मात जवाला ए

बारो महीने खुलेया रेह्न्दा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।