सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े

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॥ पावन पाठ ॥

सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

आके अलख जगाया है देखो माँ रत्नो दे वेखदे,

सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

शीश झुकाये इस योगी के सूरत कितनी भोली,

गले में जचती सिंगी सोनी कंधे लटके झोली,

तन पे भस्म रमाया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

इक हाथ में चिमटा सोहे दूजे हाथ में वैरागी,

इतनी छोटी उम्र में बालक बन गया क्यों त्यागी,

सब का मन भरमाया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

जूनागढ़ गुजरात से आया ये जोगी मतवाला,

माँ लक्ष्मी का प्यारा कहता कर्मा रोपड़ वाला,

ये भोले की माया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

सोहना जोगी आया है देखो माँ रत्नो दे वेहड़े,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।