पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा

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॥ पावन पाठ ॥

पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा,

तेरी भगति में खो जाऊ,

दुनिया को मन से बिसराऊ,

मैं भी तेरा लाल कहाऊ

इस चिमटे की शक्ति न्यारी,

गोरख की मण्डली थी हारी,

इस लिए माने दुनिया सारी,

पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा,

चिमटा दुखो को है हरता जो चिमटे की पूजा करता,

खुशियों से वो झोली भरता,

पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा,

चिमटा नाथ के हाथ में साजे हर कोई नाचे जब ये बाजे,

बाबा दिन में आन विराजे,

जोगी मेरे सोने मीठा मीठा चिमटा वजा,

कमल किशोर कवि ये गाता राज भेटे लिखता जाता,

इस चिमटे की महिमा गाता,

पौणाहारी मीठा मीठा चिमटा वजा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।