सब मसले हो गये हल मेरे लड़ जद दा जोगी दा फड़ेया है

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॥ पावन पाठ ॥

सब मसले हो गये हल मेरे लड़ जद दा जोगी दा फड़ेया है,

इंज चरनी लाया दाते ने मेनू रंग खुशियाँ दा चद्देया है

जींद मांगती जन्मा जन्मा दी दर दर तो मंगदी फिरदी सी,

तेथो जो मंगिया मैनु सब मिलिया एहो वेख ज़माना सड़ेया है,

लड़ जद दा जोगी दा फड़ेया है..........

जो हाल मेरे ते हसदे ने हस लेन मना नु खुश कर के,

इस चन्द्रे जग दे बोला नु मैं विच सीने दे जड़िया है,

सब मसले हो गये हल मेरे लड़ जद दा जोगी दा फड़ेया है,

जिस पास निर्मल आज देखे ओह्दी रेहमत दे सिर नावे ने,

विक्की ओट जोगी दी नु लेके संजीव दुखा नाल लड़ैया है,

सब मसले हो गये हल मेरे लड़ जद दा जोगी दा फड़ेया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।