ला दे दतेया वे अपने नाम वाली मेहँदी

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॥ पावन पाठ ॥

ला दे दतेया वे अपने नाम वाली मेहँदी,

नाम वाली मेहँदी जेहड़ी कदे भी न लेहँदी,

ला दे साइयाँ अपने नाम वाली मेहंदी,

एह मेहँदी नहीं मिलदी बज़ारे,

नहीं मिल सकदी लखि हज़ारे,

करमा वाले लाउंदे तेरे नाम वाली मेहंदी ,

ला दे दतिया वे अपने नाम वाली मेहँदी,

एह मेहँदी जेहड़े भगता ने लाइ,

ला के होये तेरे नाम दे शुदाई,

चढ़ गई नाम खुमारी,

तेरे नाम वाली मेहँदी,

ला दे दतिया वे अपने नाम वाली मेहँदी,

एह मेहँदी तू सबने दे लावे नाम अपने दा रंग लगा दे,

जेहड़ा रंग सवाया आ नाम वाली मेहँदी,

ला दे दतिया वे अपने नाम वाली मेहँदी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।