जबसे निहारा रूप तुम्हारा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जबसे निहारा रूप तुम्हारा लगता नहीं है प्यारा कोई,

कैसे बताये तुझको कन्हैया मिलने को आंखे है कितनी है रोइ,

सांवरिया तेरी सूरत पे सूरज चंदा भी बलिहारी,

आखियो से बरसता अमृत है मुस्कान पे सब दुनिया हारी,

इस दुनिया में श्याम से सूंदर हो सकता है कोई नहीं,

कैसे बताये तुझको कन्हैया मिलने को आंखे है कितनी है रोइ,

मुरली की मधुर तान से मोहन मुरझाया मन भी खिल जाता,

जो संग में तेरे खेले है वैसा इक पल भी मिल जाता,

जन्मो से प्यासी इन अखियां को मिल जाता सागर कोई

कैसे बताये तुझको कन्हैया मिलने को आंखे है कितनी है रोइ,

तेरा ही सुमिरन हो जीवन तेरा ही दर्शन पाये नेयंन,

जब तक सांसो का साज भजे गूंजे तेरे नाम की सरगम,

राजू की दुनिया से हो जब विदाई सपनो में तेरे हो कोई कोई,

कैसे बताये तुझको कन्हैया मिलने को आंखे है कितनी है रोइ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।