अस्सी कुण्डा खड़कायी जाना ए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बूहे भावें मन्दिराँ दे खोल या ना खोल,

अस्सी कुण्डा खड़कायी जाना ए ।

मर्जी ए तेरी चाहे बोल या न बोल,

ऐसी माँ माँ कह के बुलाई जाना ए ॥

बच्चेयाँ दी भूलां उत्ते मावां पौन पर्दा,

भूल हो ही जांदी ए, कोई जान के नहीं करदा ।

लख्ख फटकार भावें गुस्से विच्च बोल,

ऐसी हसके तैनू वी मनाई जाना ए ॥

चाहे दुत्कार चाहे ठोकरा वी मार माँ,

ऐसी वी हां टीठ पक्के छडांगे ना द्वार माँ ।

सुख विच रख भावें दुख विच्च रोल,

अस्सी सर अपना ही झुकाई जाना ए ॥

बच्चियां दे बाजो तैनू माँ किसे कहना नहीं,

बच्चियां नाल रूस के माँ चैन तैनू पैना नहीं ।

कदी खुश होके जे बुलावेंगी माँ कोल,

हस हस के तैनू वी हसाई जाना ए ॥

तेर ते ही हक्क साडा तेरे ते ही ज़ोर माँ,

तेरे बिना गल्ल साडी सुने कौन होर माँ ।

सुन या न सुन लेना सुख दुःख फ़ोल,

हाल ए दिल ‘दास’ ने सुनाई जाना ए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।