सिंह की सवारी आने वाली है

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॥ पावन पाठ ॥

सिंह की सवारी आने वाली है झुंझनू से दादी आने वाली है.

पलके बिछाये बैठे कब से दर्शन को नैना मेरे तरसे है

प्यार दरबार लगाने वाली है,झुंझनू से दादी आने वाली है.

सिंह की सवारी आने वाली है झुंझनू से दादी आने वाली है..

चाँद की चौंकी पर बिठायेंगे प्यारी सी मेहँदी तुझे लगायेगे,

गहरी सी मेहँदी रचने वाली है हम पर किरपा बरसाने वाली है,

सिंह की सवारी आने वाली है झुंझनू से दादी आने वाली है..

हीरो की लाल चुनरियाँ लाये है तारा और गोटा भी लगावे है,

लाल चुनरियाँ ओढ़ने वाली है भक्तो के कष्ट निवारने वाली है,

सिंह की सवारी आने वाली है झुंझनू से दादी आने वाली है..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।