म्हाने दादी प्यारी लागे

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

म्हाने दादी प्यारी लागे,

झुंझनू वाली मन भावे या मोटी सेठानी म्हाने बहुत प्यारी लगे,

थारे सिर पे चुनरियाँ चमके माथे की बिंदियां धमके,

थारे नैना माहि काजल दादी बहुत प्यारो लागे,

म्हाने दादी प्यारी लागे

माथे पे बोरलो न्यारो कानो में कुण्डल प्यारो,

थारी प्यारी सी मुश्कान दादी बहुत प्यारी लागे,

म्हाने दादी प्यारी लागे...

नथनी में हीरा सोहे बाजूबन्ध मन को मोहे,

थारे गले में नो लख हार दादी बहुत प्यारो लागे,

म्हाने दादी प्यारी लागे

थारे हाथ में कंगन भारी हाथो में मेहँदी न्यारी,

थारी प्याल की झंकार दादी बहुत प्यारी लागे,

म्हाने दादी प्यारी लागे

गुची तेरी महिमा गावे चरणों में शीश झुकावे,

दादी रखियो सबकी लाज माहने बहुत प्यारी लागे,

म्हाने दादी प्यारी लागे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।