चंडी माँ दी मूर्ति बना दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मूर्ति बनोंन वालेया मैनु चंडी माँ दी मूर्ति बना दे,

सोहना मुख तू बना दे सोहना रूप तू बना दे,

मिन्ता करे मैं सुणहार नाल जाके मैनु सोहनी नथनी बना दे,

सोहनी जहि झालर सजा दे माँ दी नथली नु नाल माँ दे नक च पवा दे,

सोहना जेहा रूप माँ दे दिल विच वस् गई ऐसा रंग रूप तू बना दे,

मूर्ति बनोंन वालेया मैनु चंडी माँ दी मूर्ति बना दे,

मिंटा करा मैं जा ललारी कॉल मैनु इक सोहनी जाहि चुनरी रंगा दे,

लाल सुहा रंग देके चंडी माँ दी चुनी नु लाल सोना घोटा भी सजा देवे,

कर देवे तेरियां मुरादा पूरियां मेरे मन दी रीज नु तू पुगा दे,

मूर्ति बनोंन वालेया मैनु चंडी माँ दी मूर्ति बना दे,

सबना नु दर्श दिखावे माँ मचेला वाली ताहि लोकि दुरो दुरो आवदे,

हुंडिया मुरादा माँ दे चरना च पुरिया ताहियो लोकि शीश नु झुकानदे,

राशि ते संदीप तेरे चरना च आये मेरी चंडी दा न भेटा तेरी गावदे,

मूर्ति बनोंन वालेया मैनु चंडी माँ दी मूर्ति बना दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।