गुरुदेव नमाह गुरुदेव नमाह

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

गुरुदेव नमाह गुरुदेव नमाह गुरुदेव नमाह

गुरु गंगा का निर्मल पानी है

जिसे नैया पार लगानी है

जिसे नैया पार लगानी है

गुरुदेव........

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णू है

गुरु शतशत परमेश्वर है

गुरु शतशत परमेश्वर है

गुरुदेव.......

जो गुरु की निंदा करते है

वह लख चौरासी भटकते है

वह लख चौरासी भटकते है

गुरुदेव.......

जो गुरु की महिमा गाते है

वह भवसागर तर जाते है

वह भवसागर तर जाते है

गुरुदेव........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।