हे शारदे मां ऐसा वर दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे शारदे माँ ऐसा वर दे,

सुंदर स्वर माँ कंठ में भर दे,

दे दे स्वर का ज्ञान,

सदा गुण गाऊ सुबहो शाम,

साँसे सात सुरों का संगम,

रा से राग का है इक बंधन,

ग से गंध को दूर माँ करदे,

दे एसा वरदान,

सदा गुण गाऊ सुबहो शाम,

माँ मन मंदिर पावन कर दे,

पाये धरा निर्मल तू वर दे,

निश चल मन से गाये सभी जन,

तेरा ही गुण गान,

सदा गुण गाऊ सुबहो शाम,

आरती तेरी माँ जो जन गावे,

सुख सम्पति धन वेह्भव पावे,

तेरे दर से जाये ना खाली,

निर्धन हो या धन वां,

सदा गुण गाऊ सुबहो शाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।