बघवा के हावय तोर सवारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घुंगरू हे पाव म,निबुवा के छाव म,नाचथे मईया छम छमा छम

बघवा के हावय तोर सवारी,सब देवता करे चारी ॥

लाली लाली हो ..करे सिंगारी॥

तै लाली लाली करे वो सिंगारी॥

दूध बरोबर पावे म दाई माहुर हावय लाली वो

तोर हथेली बग बगले मेहदी घलो हे लाली वो

लाल लगुंरवा ध्वजा धारी दाई ॥

मन्दिर के तौर ध्वजा है लाली नरियर हावय लाली

माथ के टिकली सुरुज कस लाली नख म लागे लाली

बरे ज्योति तोर नियारी दाई॥

लाली लुगरा लाली पोलखा लाली कंगना बाली

पाव म सुघ्घर माहुर लाली माता जोता वाली

लाली लाली तोर चुनरिया दाई ॥

दसमत फूल के माता लाली मांघ के सेंदुर लाली

लाली रंग मुड़ढक्की माता, ओढ़े चुनरी लाली

आये गौतम तोर दुवारी दाई॥

जय माँ चण्डी सेवा एवं भजन मण्डली

ग़ांधी नगर लाखे नगर रायपुर छत्तीसगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।