मेरी ज़िंदगी दे विच खुशिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी ज़िंदगी दे विच खुशिया तेरी रेहमत होइ ता आइयाँ,

माये सबे पुरियां होइयां ने जिह्नियाँ सी आसा मैं लाइयाँ,

मैं इस दुनिया तो तंग होक जदो दर तेरे ते आया सी,

तुहि सुन के फर्याद मेरी मैनु चरना दे नाल लाया सी,

मेरी इक भी न सुनी दुनिया ने झोली विच खैरा तू पाइया ,

मेरी ज़िंदगी दे विच खुशिया तेरी रेहमत होइ ता आइयाँ,

माँ चिंता पुरनी वालिये ने तू सब दी चिंता दूर करे,

जह्नु दुनिया ते कोई जाने ना माँ तू ओहनू मशहूर करे,

सुनिया सी अखि वेख लिया माँ किंज तू मेहरा बरसैयाँ,

मेरी ज़िंदगी दे विच खुशिया तेरी रेहमत होइ ता आइयाँ,

दुःख विच भी ते सुख विच भी पल्ला तेरा फड़ दे आ,

दई सब दे वेहड़े खुशियां माँ अरदास इको ही करदे हां,

जो भेटा करन ने लिखियाँ माँ तेरे चरना दे विच बह गइयाँ,

मेरी ज़िंदगी दे विच खुशिया तेरी रेहमत होइ ता आइयाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।