हँसके गुजार ले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मिले हैं जो चार दिन

हँसके गुजार ले

ना मिले कहीं -तो- खुशियाँ

किसी से उधार ले

मिले हैं जो चार दिन -------

चेहरा मुस्कुराता

है सबको भाता

उदासी का पर्दा -

मन से उतार लें

ना मिले कहीं- तो - खुशियाँ -

किसी से उधार ले

मिले हैं जो चार दिन

हँसके गुजार ले

फुरसत के दो पल

मिले तो - ना रो -

अपने गम का रोना

उन दो पलों को-

हँसके गुजार ले

ना मिले कहीं - तो -

खुशियाँ -

किसी से उधार ले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।